🔱 "श्लोक संग्रह" अर्थ सहित

भगवान श्री गणेश कमल पर विराजमान
 श्री गणेशजी, जो विघ्नहर्ता हैं, कमल पर विराजमान हैं 
  
🌸 भक्ति से भरे दिव्य श्लोक 🌸

श्लोक तो सभी पढ़ते हैं, लेकिन अगर उनका भावार्थ भी समझ लिया जाए — तो भक्ति की गहराई कई गुणा बढ़ जाती है। 🙏 इसलिए श्लोक पढ़ने से पहले उसका अर्थ ज़रूर जानें — तभी हृदय से प्रार्थना निकलती है।

🔱 श्री गणेश जी के श्लोक 🔱

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

👉 हे विशाल शरीर और वक्र सूंड वाले प्रभु, जो करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी हैं, कृपया मेरे सभी कार्यों को बिना विघ्न के पूर्ण करें।

गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

👉 जो गजानन हैं, भूतगणों द्वारा सेवित हैं, जम्बू और कपित्थ फलों का भक्षण करते हैं, उमा के पुत्र हैं और शोकों का नाश करते हैं — ऐसे श्री गणेश के चरणों में वंदना करता हूँ।

शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

👉 शुक्ल वस्त्रधारी, चंद्र समान उज्ज्वल, चार भुजाओं वाले और प्रसन्न मुख वाले भगवान का ध्यान करें जिससे सभी विघ्न शांत हो जाएँ।

गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् ।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीदसादनम् ॥

👉 हम गणों के स्वामी गणपति की वंदना करते हैं, जो श्रेष्ठ कवियों में श्रेष्ठ, ब्रह्मा के पूज्य और यशस्वी हैं।

ॐ गं गणपतये नमः ॥
👉 श्री गणपति को नमस्कार, जो विघ्नों को दूर करने वाले हैं।

भगवान शिव का अद्भुत रूप
भगवान शिव का अद्भुत रूप

🕉️ भगवान शिव के श्लोक 🕉️

ॐ नमः शिवाय ॥
👉 मैं शिव को नमन करता हूँ — जो कल्याणकारी, शांत और अनंत ब्रह्मांड के स्वामी हैं।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

👉 हम उस त्रिनेत्रधारी शिव की उपासना करते हैं — जो जीवन को पुष्ट करते हैं। जैसे ककड़ी डंठल से अलग हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥

👉 त्रिनेत्रधारी, भस्मलेपनधारी, सर्पों की माला धारण करने वाले, नित्य व दिगम्बर शिव को नमस्कार।

शिवाय नमस्तुभ्यं नमस्ते पार्वतीपते ।
महादेव महेशान शम्भो शंकर शाश्वत ॥

👉 हे पार्वतीपते शिव! आपको बारंबार प्रणाम। आप महादेव, शम्भू, शंकर और शाश्वत हैं।

करपुरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

👉 कपूर समान उज्ज्वल, करुणा रूपी, सर्पमाला धारी शिव और भवानी को मैं नमन करता हूँ।

लक्ष्मी जी के नारायण
महादेव जी के नारायण का अद्भुत रूप


🌟 श्री नारायण / विष्णु जी के श्लोक 🌟

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
👉 सम्पूर्ण सृष्टि के पालक श्री वासुदेव भगवान को नमस्कार।

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं ।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥

👉 जो शांत, शेषनाग पर शयन करने वाले, कमलनाभि, देवों के स्वामी, गगन समान व्यापक और शुभ हैं — ऐसे विष्णु को नमन।

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

👉 अपने सभी कर्तव्यों को त्याग कर मेरी शरण में आओ — मैं पापों से मुक्त कर दूँगा। चिंता मत करो।

नमोस्त्वनंताय सहस्रमूर्तये
सहस्रपादाक्षिशिरोरुबाहवे ॥

👉 हे अनंत रूपधारी विष्णु! सहस्त्र सिर, हाथ, नेत्र व चरण वाले प्रभु को नमस्कार।

श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभधरं पीतवर्णं संस्थितम् ।
सर्वलोकनमस्कृतं विष्णुं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

👉 श्रीवत्स चिह्न और कौस्तुभ मणि धारण करने वाले, पीताम्बरधारी भगवान विष्णु को मैं वंदन करता हूँ।

शक्ति की देवी मां दुर्गा
मां दुर्गा का भव्य रूप


🌺 माँ दुर्गा के श्लोक 🌺

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

👉 जो सभी जीवों में शक्ति रूप से विद्यमान हैं, उस देवी को बारम्बार नमस्कार।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते ॥

👉 हे मंगलमयी देवी गौरी! आप त्र्यम्बका और नारायणी हैं — आपकी शरण में मैं नमन करता हूँ।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः ।
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ॥

👉 संकट में स्मरण करने से भय नष्ट होता है, और शांतचित्त स्मरण से शुभ बुद्धि मिलती है।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
👉 देवी चामुंडा को समर्पित शक्तिशाली बीज मंत्र।

ॐ दुं दुर्गायै नमः ॥
👉 मैं माँ दुर्गा को प्रणाम करता हूँ, जो दुखों का नाश करती हैं।

धन की देवी मां लक्ष्मी
धन की देवी मां लक्ष्मी


💰 माँ लक्ष्मी के श्लोक 💰

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
👉 जो धन और ऐश्वर्य की देवी हैं, उन महालक्ष्मी को प्रणाम।

सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोऽस्तुते ॥

👉 आप सभी कार्यों की सिद्धि देने वाली मंगलमयी देवी हैं — आपकी शरण में प्रणाम।

या लक्ष्मीः चन्द्रमा लीलया चन्द्रमसि संस्थिता ।
सा लक्ष्मीः सम्पदां स्रष्ट्री नमामि तामिह सर्वदा ॥

👉 जो चंद्रमा जैसी सुंदर हैं — वही लक्ष्मी सभी सम्पत्तियों की स्त्रोत हैं।

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः ॥
👉 माँ लक्ष्मी के सभी रूपों को प्रणाम — जो सुख, धन और सौभाग्य देती हैं।

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

👉 हे लक्ष्मी माता! आप सभी देवताओं द्वारा पूजित हैं — आपको बारंबार प्रणाम।

विद्या की देवी मां सरस्वती
विद्या की देवी मां सरस्वती

📚 माँ सरस्वती के श्लोक 📚

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ॥

👉 चंद्रमा और हिम के समान श्वेत, शुभ्र वस्त्रधारी, वीणा धारण करने वाली — ऐसी माँ सरस्वती को वंदन।

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

👉 हे माँ सरस्वती! मैं पढ़ाई प्रारंभ कर रहा हूँ — कृपया सदा सिद्धि दें।

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॥
👉 ज्ञान और वाणी की देवी माँ सरस्वती को नमस्कार।

वाणीं वदामि सुखदां जगदेकमातर्ज्ञानप्रदां भगवतीं सततं नमामि ॥
👉 जो जगत की जननी हैं, ज्ञान और आनंद देने वाली हैं — उन्हें मैं सदा नमन करता हूँ।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमां आध्यां जगद्व्यापिनीम् ।
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यापहां ॥

👉 सफेद वस्त्र, पुस्तक और वीणा धारण करने वाली, जड़ता को दूर करने वाली माँ सरस्वती को नमन।

माता तुलसी का रूप
माता तुलसी की पूजा


🌞 गायत्री मंत्र 🌞

ॐ भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

🙏 भावार्थ — हम उस परम तेजस्वी, पवित्र, दिव्य प्रकाश (सविता देव) का ध्यान करते हैं — जो तीनों लोकों (भूः, भुवः, स्वः) को प्रकाशित करता है। वह हमारे बुद्धि को शुभ और सत्य के मार्ग पर प्रेरित करे।

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