रक्षाबंधन त्योहार
9 अगस्त 2025
🎇🌸 लड़की तो लक्ष्मी होती है – राखी के इस पावन पर्व पर बहनें सिर्फ राखी नहीं बांधतीं, वह अपना प्यार, आशीर्वाद और रक्षा का संकल्प भी देती है🌸🎇
🙏 जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह सिर्फ एक रेशमी धागा नहीं होता – उसमें समाहित होता है उसका अपार स्नेह, आत्मीयता, आशीर्वाद और वर्षों का विश्वास। वह अपने भाई के लिए ईश्वर से सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती है। ऐसे शुभ क्षणों में भाई को भी चाहिए कि वह बहन को केवल ‘धन’ के रूप में नहीं, बल्कि सम्मान, प्रेम और सुरक्षा के वचन के साथ उपहार दे, क्योंकि बहन केवल बहन नहीं, वह घर की लक्ष्मी होती है। उसका सस्नेह आगमन जीवन में शुभता लाता है, और उसका आशीर्वाद समस्त विघ्नों को हर लेता है। 🙏
💫 राखी बांधने का यह शुभ अवसर भाई-बहन के रिश्ते को और भी दृढ़ कर देता है। भाई को चाहिए कि वह बहन की सदा रक्षा करे, हर परिस्थिति में उसके साथ खड़ा रहे, उसके मान-सम्मान की रक्षा करे, और जब वह मुस्कुराए तो उसकी मुस्कान में सुकून ढूंढे। उपहार केवल वस्तु नहीं होते — वे उस आत्मीयता और सम्मान की अभिव्यक्ति होते हैं जो भाई के हृदय में बहन के लिए बसता है। 💫
📅 रक्षाबंधन २०२५: तिथि और शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन का यह पावन पर्व वर्ष २०२५ में शनिवार, ९ अगस्त को मनाया जाएगा। भद्रा काल 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे शुरू होगा और 9 अगस्त की सुबह 5:47 बजे समाप्त हो जाएगा, अतः 9 अगस्त की सुबह से राखी बांधना शुभ रहेगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, राखी बांधने का श्रेष्ठ मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 5:47 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा। इस वर्ष भद्रा काल नहीं है, अतः दिनभर राखी बांधना अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाएगा।
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🎁 क्यों दें गिफ्ट – बहन को, भाई को?
रक्षाबंधन पर उपहार देना केवल एक चलन या परंपरा नहीं है – यह एक गहरी भावना की पूर्ति है। जब बहन राखी बांधती है, तो वह अपनी भावनाएं भी उस धागे के साथ बांध देती है – अपने भाई की सुरक्षा, सफलता और दीर्घायु की कामना। ऐसे में भाई द्वारा दिया गया उपहार बहन के लिए प्रेम और सम्मान का प्रमाण बन जाता है। वहीं बहन भी जब भाई को उपहार देती है, तो वह वस्तु नहीं, उसके भीतर छिपा वह स्नेह और आत्मीयता होता है जो भाई को जीवनभर स्मरण रहता है।
🌺 रक्षा सूत्र बांधने की थाली में जो वस्तुएं होती हैं, उनका अर्थ और महत्व इस प्रकार है —
✨ दही (दधि) — जब बहन भाई के मस्तक पर दही का तिलक करती है, तो वह शीतलता, शुद्धता और कल्याण का प्रतीक होता है। दही में लक्ष्मी का वास माना गया है, और यह यह भी दर्शाता है कि बहन अपने भाई के जीवन में समृद्धि, संतुलन और शुभता की कामना कर रही है।
✨ अक्षत (चावल) — अक्षत का अर्थ होता है "जो टूटा न हो" — यह अखंडता और पूर्णता का प्रतीक है। जब बहन तिलक पर चावल चिपकाती है, तो वह कामना करती है कि भाई का जीवन कभी अपूर्ण न हो, वह हर स्थिति में पूर्ण, सुरक्षित और सफल रहे। यह चिरंजीव होने का आशीर्वाद है।
✨ कुमकुम/सिंदूर — तिलक में सिंदूर लगाने का अर्थ है तेज, शक्ति और विजय की कामना करना। यह मंगल का प्रतीक है और एक तरह से बहन अपने भाई के जीवन में शक्ति और यश का तिलक करती है।
✨ दीपक और अगरबत्ती — दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि भाई का जीवन हमेशा प्रकाश से भरा रहे और वह कभी अंधकार में न फंसे। अगरबत्ती सुगंध और शुद्धता लाती है, जिससे वातावरण पवित्र बनता है।
✨ मिठाई — बहन मिठाई से अपने प्रेम की मिठास बांटती है, और यह संकेत करती है कि जीवन में मिठास बनी रहे, रिश्तों में कड़वाहट कभी न आए।
🪔 तिलक और रक्षासूत्र का महत्व
तिलक एक प्रकार का आध्यात्मिक चिन्ह है जो मस्तक पर लगाया जाता है। यह शुभता, ऊर्जा और आत्मिक शांति का प्रतीक होता है। जब बहन अपने भाई के मस्तक पर तिलक करती है, तो वह उसके भाग्य को शुभकामनाओं से आलोकित करती है। वहीं रक्षासूत्र – जिसे हम 'राखी' कहते हैं – केवल रेशमी धागा नहीं, वह आशीर्वाद का वह बंधन होता है जो जीवनभर टूटता नहीं। यह बंधन रक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
🧵 राखी कैसे बनाएं – सरल विधि
आप खुद घर पर राखी बनाकर इस पर्व को और भी आत्मीय बना सकती हैं। इसके लिए एक सुंदर रेशमी धागा लें। उसमें मोती, चमकदार पत्थर या कोई छोटा-सा लक्ष्मी-गणेश का चित्र जोड़ें। बीच में रंग-बिरंगे फूल या सितारे भी सजा सकती हैं। जब भाई की कलाई पर राखी बांधें, तो उसे तीन बार लपेटें और गांठ बांधते हुए मन ही मन संकल्प लें – कि ईश्वर उसके जीवन को खुशियों से भर दे, वह हर संकट से सुरक्षित रहे और उसका भविष्य उज्ज्वल हो।
📿 रक्षाबंधन की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा की थाली में राखी, तिलक, चावल, दीपक और मिठाई रखें।
- भाई को तिलक करें, आरती उतारें और राखी बांधें।
- मिठाई खिलाएं और फिर भाई से आशीर्वाद एवं उपहार लें।
🙏 क्यों यह पर्व ज़रूरी है?
रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, यह एक भावनात्मक रिश्ता है – भाई और बहन के बीच का अटूट बंधन। यह पर्व हमें परिवार, संस्कृति और आत्मीयता के महत्व को समझाता है। यह केवल रेशमी धागे का नहीं, आत्मा के पवित्र रिश्ते का उत्सव है। भाई-बहन का यह संबंध न केवल इस जन्म का, बल्कि जन्म-जन्मांतरों का होता है – एक ऐसा रिश्ता जो न तर्क समझता है, न दूरी – केवल प्रेम में रचा-बसा होता है।
आज रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं रहा, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर में यह परंपरा विस्तार ले चुकी है, जहाँ बहन भाई के साथ-साथ भाभी को भी राखी बांधती है। भाभी को लुंबा राखी बाँधने की यह परंपरा अब केवल मिथिला तक सीमित नहीं रही — यह चलन पूरे देश में फैल गया है। इससे बहन और भाभी के रिश्ते में आत्मीयता और सम्मान और भी गहरा हो जाता है। भाभी भी बहन के प्रेम को अपनाकर अपने हाथों में राखी बंधवाती हैं, जो रिश्तों की मधुरता और पारिवारिक एकता का प्रतीक बन चुका है। अब यह पर्व न केवल भाई की रक्षा का संकल्प है, बल्कि पूरे परिवार को एक प्रेम सूत्र में बाँधने का अवसर बन गया है — जिसे पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है।
🌺 मिथिला में राखी की परंपरा — स्नेह, तिलक और लुम्बा का लोकसंस्कार 🌸
🌸 मिथिला में रक्षा बंधन बड़े ही भावपूर्ण और पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। बहनें सुंदर थाली सजाकर उसमें सिंदूर, अक्षत (चावल), दीपक, दही, राखी और मिठाई रखती हैं। भाई की आरती उतारकर पहले दही-चावल का तिलक करती हैं, फिर राखी बाँधती हैं। अगर बहन छोटी है तो भाई से आशीर्वाद लेती है, और यदि बड़ी है तो भाई को आशीर्वाद देती है — साथ ही स्नेह से उपहार भी पाती है। मिथिला में यह भी परंपरा है कि बहनें अपने भावी (भाभी) को भी राखी बाँधती हैं, जिसे लुम्बा राखी कहा जाता है, ताकि भाई-भाभी दोनों की जोड़ी सुखमय बनी रहे। यह पर्व केवल रक्षा का नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और पारिवारिक एकता का उत्सव है। 💖
📖 रक्षाबंधन की विस्तृत पौराणिक कथाएँ
1. श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा
महाभारत काल की यह कथा अत्यंत प्रसिद्ध है। जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल वध के समय सुदर्शन चक्र चलाया, तो उनका अंगूठा कट गया। यह देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांध दिया। श्रीकृष्ण भावविभोर हो उठे और उन्होंने वचन दिया कि वह जीवनभर उसकी रक्षा करेंगे। उन्होंने यह वचन चीरहरण के समय निभाया। यही रक्षाबंधन की आत्मा है – रक्षा का अमर वचन।
2. रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ
१६वीं सदी में जब चित्तौड़ पर बहादुर शाह ने आक्रमण किया, तब रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी। यह उस समय की बात थी जब धर्म और राजनीति के बीच गहरी खाई थी। फिर भी, हुमायूँ ने राखी का मान रखा और अपनी सेना लेकर रानी की रक्षा को निकल पड़ा। यद्यपि वह देर से पहुंचा, लेकिन यह घटना राखी की सामाजिक महत्ता को रेखांकित करती है।
3. इंद्राणी और इंद्र की कथा
भविष्य पुराण के अनुसार, जब असुरों से युद्ध में इंद्र पराजित हो रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक पवित्र धागा मंत्रों से अभिमंत्रित कर उनकी कलाई पर बांधा। उस धागे की शक्ति से इंद्र को विजय प्राप्त हुई। यह दर्शाता है कि रक्षासूत्र केवल प्रतीक नहीं, वह ईश्वर की शक्ति से युक्त होता है।
4. यम और यमुना की कथा
यमराज और यमुना के बीच का भाई-बहन का प्रेम भी इस पर्व को अलौकिकता देता है। जब यमुना ने यमराज को राखी बांधी, तो यमराज ने वचन दिया कि जो बहन अपने भाई को राखी बांधती है, वह दीर्घायु होगी और उसका जीवन सुखमय रहेगा।
5. लक्ष्मी और राजा बलि की कथा
श्रीमद्भागवत पुराण में यह कथा आती है – जब भगवान विष्णु राजा बलि के वचन अनुसार उसके साथ पाताल में रहने लगे, तब लक्ष्मीजी ने एक ब्राह्मणी का रूप धारण कर राजा बलि को राखी बांधी और अपने पति को वापस मांगा। राजा बलि ने वचन निभाया और विष्णुजी को वैकुंठ लौटा दिया। यह कथा रक्षाबंधन के उस पक्ष को दिखाती है जहाँ यह वचन, प्रेम और नीति का प्रतीक बनता है।





