🌺 गणेश चतुर्थी : भारत के विभिन्न क्षेत्रों में एक पावन उत्सव 🌺
गणेश चतुर्थी, जो भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और परिवार के प्रेम का अद्भुत संगम भी है। इस त्योहार के दौरान हर दिल में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित होती है और जीवन से विघ्नों का नाश होने की कामना की जाती है। भारत के विभिन्न भागों में गणेश चतुर्थी की परंपराएं, रीति-रिवाज और उत्सव के रंग अलग-अलग हैं, जो हमारी विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं
🌺गणेश चतुर्थी: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में एक पावन उत्सव 🌺
गणेश चतुर्थी, जो भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और परिवार के प्रेम का अद्भुत संगम भी है। इस त्योहार के दौरान हर दिल में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित होती है और जीवन से विघ्नों का नाश होने की कामना की जाती है। भारत के विभिन्न भागों में गणेश चतुर्थी की परंपराएं, रीति-रिवाज और उत्सव के रंग अलग-अलग हैं, जो हमारी विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
📖 गणेश चतुर्थी की कथा और भगवान गणेश का महत्व
भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि, समृद्धि और ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उनकी जन्म कथा भारतीय पुराणों में अत्यंत रोचक एवं गूढ़ अर्थों से परिपूर्ण है।
कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने स्नान के दौरान शरीर की मिट्टी से एक बालक का निर्माण किया और उसे द्वारपाल नियुक्त किया। जब शिवजी घर लौटे, तो उस बालक ने उन्हें घर में प्रवेश करने से रोक दिया। क्रोधित होकर शिवजी ने उस बालक का सिर काट दिया। माता पार्वती के दुःख को देखकर शिवजी ने हाथी के सिर वाला बालक बनाया और उसे जीवित किया। इस बालक को गणेश नाम दिया गया और वे प्रथम पूज्य देवता बने।
गणेश जी सभी विघ्नों को दूर करते हैं और नवयात्रा, शिक्षारंभ, विवाह आदि शुभ कार्यों में उनका पूजन अनिवार्य माना जाता है। वे बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के दाता हैं। गणेश चतुर्थी के दिन उनकी पूजा कर विघ्नों से मुक्ति और जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है।
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| विघ्न विनाशक 🎇 गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है? ✨ गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः अगस्त या सितंबर के महीने में आती है। यह पर्व दस दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी को गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होता है। साल 2025 में गणेश चतुर्थी 26 अगस्त 2025, दोपहर 1:54 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त 2025, दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए मुख्य मुहूर्त मध्याह्न में 27 अगस्त 2025 को लगभग 11:05 AM से 1:40 PM तक का शुभ समय है। विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) 6 सितंबर 2025 को होगा। मिथिला में चौरचन पावन 26 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। |
🔔 गणपति अथर्वशीर्ष मंत्र (अंश)
ॐ तत्त्वमादिदेवदेव श्रीगणेशाय नमः।
ॐ गं गणपतये नमः।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
(हे भगवान गणेश, जिनका सिर वक्र और शरीर महाकाय है, जो सूर्य के समान तेजस्वी हैं, कृपया मेरे सभी कार्यों को बिना विघ्न के पूर्ण करें।)
🌾 भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी के अनूठे आयोजन
मिथिला में गणेश पूजा का चौरचन पावन — गणेश चतुर्थी का पारंपरिक उत्सव 🌙🙏
🙏मिथिला में चौरचन पावन (चौठ चंद्र पूजा) जिसे गणेश पूजा का चौरचन पावन भी कहा जाता है, बड़े हर्ष और पारंपरिक रीति से मनाया जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन, शाम ढलते ही गांव-गांव के आंगन, छत या बग़ीचे में गोबर से सुंदर चौक-चंपा बनाए जाते हैं, जिन पर अरवा चावल, दही, दूध, मिठाई, पान-सुपारी, फल, सब्जियां और विशेष रूप से रोटी व खीर चढ़ाई जाती है। महिलाएं रंग-बिरंगी साड़ी पहनकर, माथे पर सिंदूर की डिबिया और हाथ में सजी हुई थाली लेकर, संतान की लंबी उम्र, घर की सुख-समृद्धि और पति के कल्याण की कामना से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। चांद निकलते ही उसे जल, दूध और अरवा अर्पित किया जाता है तथा 13 प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। पूजा पूर्ण होने के बाद परिवार और पड़ोस के साथ चांदमुखी प्रसाद बांटा जाता है और घर-आंगन गीत-संगीत से गूंज उठता है। 🌙✨
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जिनके यहां यह पवन नहीं होता वे लोग भी छत पर जाकर चंद्रमा — “चंदा मामा” — को प्रणाम करते हैं। वे चतुर्थी के इस पावन चांद को अगरबत्ती और दीप दिखाकर पूजन करते हैं, फिर हाथों में प्रसाद लेकर चंद्रमा को प्रणाम करते हुए उसका भोग लगाते हैं। मान्यता है कि इस दिन का चतुर्थी चांद खाली हाथ नहीं देखा जाता, इसलिए प्रसाद या राशन अवश्य अर्पित किया जाता है। इस दिन का यह प्रसाद अमृत के समान पवित्र माना जाता है, जिसे ग्रहण करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 🌕✨।
- लोकगीत और भजन: मैथिली लोकगीतों में गणेश जी की महिमा का वर्णन होता है, जो पूजा के दौरान गाए जाते हैं।
- सामूहिक पूजन: गांव-गांव सामूहिक पूजा होती है, जिससे सामाजिक मेलजोल बढ़ता है।
- फल-फूल और मोदक वितरण: पारंपरिक मिठाइयों का वितरण होता है, जो इस त्योहार की खास पहचान है।
मिथिला में यह त्योहार लोक संस्कृति के गहन भाव और भक्ति की अभिव्यक्ति का सुंदर उदाहरण है।
बिहार में गणेश चतुर्थी का उत्सव
बिहार में गणेश चतुर्थी बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहरों में भव्य पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
- भजन-कीर्तन और धार्मिक नाटक: सांस्कृतिक रंगत बढ़ाने के लिए स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां होती हैं।
- घर-घर पूजा: बिहार में घरों में गणेश जी की स्थापना कर पूजा की जाती है।
- विसर्जन उत्सव: दसवें दिन मूर्ति का नदी-तालाब में विसर्जन होता है।
मुंबई में गणेश चतुर्थी का भव्य उत्सव
मुंबई का गणेश चतुर्थी उत्सव देश में सबसे प्रसिद्ध और भव्य है। लोकमान्य तिलक ने इसे सार्वजनिक रूप से मनाने का प्रवर्तन किया था, जिससे यह त्यौहार सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
- प्रारंभ: गणेश जी की मूर्तियां त्योहार से लगभग 10-12 दिन पहले लायी जाती हैं।
- लालबागचा राजा: मुंबई का प्रसिद्ध गणेश मंडल, जहां लाखों भक्त दर्शन करते हैं।
- सिद्धिविनायक मंदिर: विश्व प्रसिद्ध मंदिर, जहां रोज़ भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: भजन, नृत्य, और नाटक आयोजित होते हैं।
- समुद्र में विसर्जन: अनंत चतुर्दशी को गणपति की प्रतिमाएं समुद्र में विसर्जित की जाती हैं।
दिल्ली में गणेश चतुर्थी के उत्सव
दिल्ली में गणेश चतुर्थी का उत्सव पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यहां के मंदिरों और मंडलों में भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठे होते हैं।
- भजन-कीर्तन और पूजा: विभिन्न मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
- सांस्कृतिक विविधता: विभिन्न समुदाय मिलकर यह पर्व मनाते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: मिट्टी की प्रतिमाएं इस्तेमाल कर पर्यावरण जागरूकता बढ़ाई जाती है।
- मंडल प्रतियोगिताएं: मंडलों के बीच सजाट और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
🌟 गणेश चतुर्थी पूजा के शुभ मुहूर्त (2025)
| कार्य | तिथि | समय | विशेष विवरण |
|---|---|---|---|
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 26 अगस्त 2025 | 1:54 बजे दोपहर से | शुभ आरंभ |
| चतुर्थी तिथि समाप्ति | 27 अगस्त 2025 | 3:44 बजे दोपहर तक | पूजा हेतु उपयुक्त |
| मध्याह्न पूजा मुहूर्त | 27 अगस्त 2025 | 11:05 AM से 1:40 PM तक | शुभ मुहूर्त |
| भारत में सार्वजनिक अवकाश | 27 अगस्त 2025 | पूरा दिन | पूजा और उत्सव हेतु |
| विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) | 6 सितंबर 2025 | सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक | विसर्जन हेतु शुभ समय |
🌺 गणेश चतुर्थी 2025 - तिथि एवं समय 🌺
| कार्य | तिथि एवं समय |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 26 अगस्त 2025, 1:54 बजे दोपहर |
| चतुर्थी तिथि समाप्ति | 27 अगस्त 2025, 3:44 बजे दोपहर |
| मध्याह्न पूजा मुहूर्त | 27 अगस्त 2025, लगभग 11:05 AM से 1:40 |
🌸 गणेश चतुर्थी के प्रिय भोग और सांस्कृतिक महत्व
गणेश जी के प्रिय भोग में मोदक का विशेष स्थान है, जिसे ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा लड्डू, नारियल, गुड़-तिल, फल और पंचामृत भी पूजा में अर्पित किए जाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में लोकगीत और भजन इस पर्व को और भी भक्तिमय बनाते हैं।
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| गणेश जी के प्रिय भोग |
गणेश चतुर्थी सिर्फ एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक मेलजोल और भारतीयता की अनुभूति का भी प्रतीक है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा इसे सार्वजनिक रूप से मनाने के प्रस्ताव ने इसे स्वतंत्रता संग्राम से भी जोड़ दिया। यह पर्व लोगों को जोड़ता है, उनके दिलों में एकता और भक्ति की भावना भरता है।
✨ गणपति बप्पा मोरया! 🙏
“हे गणपति! हमारे जीवन से सभी विघ्न दूर करें, हमें बुद्धि, शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद दें। आपका आशीर्वाद सदैव हमारे साथ बना रहे। गणपति बप्पा मोरया !
श्री गणेश जी की संपूर्ण चालीसा, आरती और मंत्र का पाठ अब आपके लिए उपलब्ध है।
कृपया यहाँ क्लिक करके जरूर पढ़ें और गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त करें। 🙏✨
🕉️ विघ्नहर्ता बप्पा मोरया! 🕉️

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Bahut khoob👍🏻👍🏻
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