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| करवा चौथ |
🌸 भगवान : करवा चौथ का इतिहास और धार्मिक महत्व 🌸
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और त्याग का सुंदर प्रतीक है। भारत में यह पर्व विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
🌼 करवा चौथ शब्द का अर्थ
👉 “करवा” का अर्थ है मिट्टी का छोटा घड़ा, जिसे पूजा में प्रयोग किया जाता है।
👉 “चौथ” का अर्थ है महीने की चौथी तिथि।
इस दिन महिलाएँ करवा (घड़ा) में जल भरकर चाँद को अर्घ्य देती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
🕉️ करवा चौथ का ऐतिहासिक मूल
करवा चौथ का उल्लेख महाभारत काल से मिलता है।
द्रौपदी ने भी यह व्रत रखा था जब पांडव संकट में थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इसके महत्व के बारे में बताया था।
एक अन्य कथा के अनुसार, वीरवती नाम की एक रानी ने अपने पति की रक्षा के लिए यह व्रत रखा। उसकी सच्ची श्रद्धा से यमराज को भी उसके पति को जीवन लौटाना पड़ा।
💫 धार्मिक महत्व
यह पर्व केवल पति-पत्नी के रिश्ते तक सीमित नहीं, बल्कि स्त्री के आत्मबल, भक्ति और निष्ठा का भी प्रतीक है।
यह हमें सिखाता है —
“सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि विश्वास और त्याग में होता है।”
🌺 व्रत का आध्यात्मिक पक्ष
करवा चौथ का व्रत माँ गौरी और भगवान शिव को समर्पित है। माँ गौरी को “सौभाग्य की देवी” कहा गया है। कहा जाता है कि जो महिला श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। यह दिन शक्ति, भक्ति और श्रद्धा — तीनों का संगम है।
✨ सामाजिक संदेश
करवा चौथ केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
🌸 यह स्त्रियों के आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक है।
🌸 सास-बहू का रिश्ता और मधुर बनता है।
🌸 पति-पत्नी के बीच का विश्वास और मजबूत होता है।
🌕 भगवान : करवा चौथ की कथा (वीरवती की कहानी) 🌕
बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य में एक राजकुमारी वीरवती रहती थी। वह सात भाइयों की इकलौती बहन थी और सबकी दुलारी थी। जब वीरवती का विवाह हुआ, तो विवाह के बाद उसने पहली बार अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखा।
🌸 उपवास की शुरुआत
वीरवती ने सूर्योदय से पहले स्नान किया, देवी-देवताओं की पूजा की और निर्जला व्रत आरंभ किया। दिनभर वह भूखी-प्यासी रही, लेकिन उसका चेहरा श्रद्धा और भक्ति से चमक रहा था।
संध्या होते-होते भूख और प्यास से वह बहुत कमजोर पड़ गई। भाई अपनी प्यारी बहन को कष्ट में देखकर व्याकुल हो उठे। उन्होंने सोचा — अगर चाँद निकल आए तो बहन कुछ खा लेगी।
🌕 भाइयों की भूल
उन्होंने पहाड़ के पीछे एक दीपक जलाया और छलनी के पीछे से दिखाकर कहा —
“बहन! चाँद निकल आया है, अब तुम व्रत तोड़ लो।”
वीरवती ने विश्वास कर लिया, और बिना सही चाँद देखे ही अपना व्रत तोड़ लिया।
😔 दुर्भाग्य का समय
जैसे ही उसने भोजन किया, उसे बुरी खबर मिली — उसका पति गंभीर रूप से बीमार पड़ गया है। वीरवती रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी। उसने अपने पाप का कारण समझ लिया कि उसने अधूरा व्रत तोड़ा था।
🕉️ सच्ची भक्ति का प्रभाव
वीरवती ने दृढ़ निश्चय किया कि वह अगले साल पूर्ण श्रद्धा से करवा चौथ का व्रत करेगी। पूरे वर्ष तक उसने उपवास, पूजा और भक्ति में समय बिताया। अगले करवा चौथ पर जब उसने नियमपूर्वक व्रत रखा, तब उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती स्वयं प्रकट हुईं।
माँ ने कहा — “पुत्री, तूने सच्चे मन से यह व्रत किया है, अब तेरा पति दीर्घायु होगा।”
और उसी क्षण उसका पति स्वस्थ हो गया। उस दिन से करवा चौथ व्रत का महत्व और भी बढ़ गया।
💫 संदेश
यह कथा सिखाती है कि सच्ची निष्ठा, भक्ति और प्रेम से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। वीरवती की तरह जो स्त्री अपने पति के लिए पूर्ण श्रद्धा से व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य और सुखी जीवन का वरदान मिलता है
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| करवा चौथ पूजन |
🌺 भगवान : करवा चौथ पूजा विधि और सामग्री सूची 🌺
करवा चौथ का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि यह स्त्री की भक्ति, सौभाग्य और प्रेम की अभिव्यक्ति है। इस दिन महिलाएँ माँ गौरी, भगवान शिव, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा करती हैं। पूजा का समय और विधि बहुत ही शुभ मानी जाती है।
🕰️ पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ की तिथि: 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 9 अक्टूबर 2025, रात 10:54 बजे
चतुर्थी तिथि का समापन: 10 अक्टूबर 2025, शाम 7:38 बजे
पूजा मुहूर्त: शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक
व्रत का समय: सुबह 6:19 बजे से शाम 8:13 बजे तक
चाँद का उदय (चाँद निकलने का समय): शाम 8:13 बजे
🌼 पूजा के लिए आवश्यक सामग्री सूची
पूजा के लिए यह सामग्री पहले से तैयार रखनी चाहिए —
- करवा (मिट्टी या पीतल का घड़ा)
- दीपक (घी या तेल का)
- चावल, रोली, सिंदूर, हल्दी, अक्षत
- लाल चुनरी और साड़ी
- थाली (पूजा थाल)
- सोलह श्रृंगार की वस्तुएँ
- मिठाई और फल
- चाँद देखने के लिए छलनी
- पानी से भरा लोटा या करवा
- कपूर, धूप, फूल, कलश
- कथा पुस्तक (करवा चौथ की कहानी)
💄 सोलह श्रृंगार की सूची
करवा चौथ पर महिलाएँ अपने सोलह श्रृंगार करती हैं क्योंकि यह सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक है —
- बिंदी
- सिंदूर
- काजल
- मांग टीका
- झुमके
- हार
- चूड़ियाँ
- बिछिया
- पायल
- अंगूठी
- कमरबंद
- गजरा
- महावर
- इत्र
- लिपस्टिक
- साड़ी या लाल परिधान
💫 कहा जाता है कि जो स्त्री सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करती है, उसका सौभाग्य कभी कम नहीं होता।
🌸 करवा चौथ पूजा विधि
👉 सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें (सास द्वारा दी गई थाली)।
👉 दिनभर निर्जला व्रत रखें, यानी जल या भोजन ग्रहण न करें।
👉 शाम को पूजा स्थल सजाएँ और माँ गौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
👉 पूजा थाली में दीपक, रोली, चावल, करवा और मिठाई रखें।
👉 सब महिलाएँ मिलकर माँ गौरी की आरती करें और करवा चौथ की कथा सुनें।
👉 कथा के बाद पति की लंबी उम्र की कामना करें।
👉 जब चाँद निकल आए तो छलनी से चाँद देखें, फिर अपने पति का चेहरा देखें।
👉 पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत समाप्त करें।
🌕 पूजा के नियम और सावधानियाँ
- व्रत के दौरान सच्चे मन से भगवान की आराधना करें।
- पूजा से पहले स्नान अवश्य करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- व्रत तोड़ने से पहले किसी प्रकार का भोजन या जल न लें।
- पूजा के समय मन को शांत और सकारात्मक रखें।
- सास या घर की बड़ी महिला का आशीर्वाद लें।
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| सरगी |
🌅 भगवान : करवा चौथ की सरगी और सुबह की परंपरा 🌅
करवा चौथ का दिन महिलाओं के लिए अत्यंत विशेष होता है। यह दिन सूर्योदय से पहले शुरू होता है — ‘सरगी’ से। सरगी का समय और भावनात्मक महत्व करवा चौथ की पूरी परंपरा का सबसे कोमल और सुंदर पहलू है।
🌸 सरगी क्या है?
सरगी वह थाली होती है जो सास अपनी बहू को सूर्योदय से पहले देती है। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि आशीर्वाद और प्रेम की प्रतीक थाली होती है। सरगी खाने के बाद बहू दिनभर निर्जला व्रत रखती है।
कहा जाता है कि सरगी लेने से पहले सास का आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ होता है। यह न केवल व्रत की शुरुआत है, बल्कि माँ-बेटी जैसे संबंध का आरंभ भी माना जाता है।
🍽️ सरगी में क्या-क्या शामिल होता है?
हर घर की परंपरा के अनुसार सरगी की थाली थोड़ी भिन्न हो सकती है, पर सामान्यतः इसमें यह चीज़ें होती हैं —
- सूखे मेवे (काजू, बादाम, किशमिश)
- मिठाई (खीर, रसगुल्ला या हलवा)
- फ्रूट्स (सेब, केला, अनार आदि)
- पराठे या पूरी
- नारियल पानी या दूध
- सेवई या फेनी
- एक कप चाय या कॉफी (कुछ जगह परंपरा अनुसार अनुमति है)
- पान और सुपारी
सरगी की थाली हमेशा चाँदी या स्टील की थाल में सजी होती है, और उसके साथ सास अपने आशीर्वाद के रूप में साड़ी, बिंदी या चूड़ियाँ भी देती हैं।
💞 सरगी का भावनात्मक महत्व
सरगी केवल एक थाली नहीं होती, यह ममता, प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक होती है। सास अपने आशीर्वाद से बहू को व्रत के लिए शक्ति और सौभाग्य देती है। बहू भी श्रद्धा से वह सरगी ग्रहण करती है और सास के प्रति सम्मान प्रकट करती है।
सरगी यह सिखाती है कि एक परिवार में प्रेम और आशीर्वाद का बंधन कितना पवित्र होता है।
🌞 सरगी का समय और नियम
👉 सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है।
👉 इसके बाद व्रतधारी महिला पूरे दिन कुछ नहीं खाती-पीती।
👉 सरगी खाने से पहले भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव का स्मरण किया जाता है।
👉 सास को धन्यवाद दिया जाता है और उनके चरण स्पर्श किए जाते हैं।
💫 जो बहू सास से दूर रहती हैं, वे फोन या वीडियो कॉल पर उनका आशीर्वाद लेकर सरगी ग्रहण कर सकती हैं।
🌺 सरगी थाली सजाने के तरीके
थाली को सुंदर बनाना शुभ माना जाता है —
- लाल या सुनहरी प्लेट में भोजन रखें।
- थाली में दीपक जलाएँ।
- मिठाई और फल आकर्षक ढंग से सजाएँ।
- सास का नाम मन ही मन लेकर थाली ग्रहण करें।
🌸 भगवान : करवा चौथ की कथा (वीरवती) और रस्में 🌸
बहुत समय पहले की बात है। राजकुमारी वीरवती अपने पति से अत्यंत स्नेह करती थी। उसने अपने पति के लिए पहला करवा चौथ का व्रत रखा।
🌅 सुबह और सरगी
सूर्योदय से पहले उसकी सास ने सरगी दी — यह केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रेम और आशीर्वाद की थाली थी। इस थाली में सूखे मेवे, मिठाई, फल, पराठे और दूध थे। वीरवती ने सास से आशीर्वाद लिया और पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प किया।
🌸 दिन भर की व्रत प्रक्रिया
दिनभर वीरवती भूखी और प्यासे रहने के बावजूद अपने मन को शांत रखती और भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति में लीन रहती। महिलाएँ इस दिन अपनी सोलह श्रृंगार करती हैं: बिंदी, काजल, सिंदूर, झुमके, हार, चूड़ियाँ, पायल और लाल साड़ी। पूरे दिन उन्हें पूजा की तैयारी में लगना और मन को शुभ रखना चाहिए।
🌕 शाम का महत्व और पूजा
जैसे ही सूर्यास्त होता है, घर को दीपक और फूलों से सजाया जाता है। महिलाएँ करवा (घड़ा), पूजा थाली, दीपक, रोली, चावल, हलवा और मिठाई सजाती हैं। फिर कथा का पाठ किया जाता है — वीरवती की कहानी सुनाई जाती है।
💞 कथा का मोड़
वीरवती ने अधूरा व्रत तोड़ लिया था, जिसके कारण उसके पति बीमार पड़ गए। अगले वर्ष उसने पूर्ण भक्ति और श्रद्धा से व्रत किया। माता पार्वती ने प्रकट होकर उसे वरदान दिया कि उसका पति दीर्घायु और स्वस्थ रहेगा। यह दिखाता है कि सच्ची निष्ठा और प्रेम हमेशा फल देती है।
🌸 चाँद देखना और व्रत पूर्ण करना
चाँद निकलते ही महिलाएँ छलनी से चाँद को देखती हैं। इसके बाद पति का चेहरा भी देखती हैं और उसके हाथ से जल ग्रहण कर व्रत समाप्त करती हैं। यह रस्म पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन का प्रतीक है।
✨ और रस्में जो महिलाएँ करती हैं
- सास से आशीर्वाद लेना और सरगी ग्रहण करना।
- घर को साफ और रंगोली से सजाना।
- पूजा स्थल पर दीपक, करवा, फूल, हलवा और मिठाई सजाना।
- कथा सुनना और आरती करना।
- चाँद को छलनी से देखना और पति के लिए प्रार्थना करना।
- व्रत के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर पूजा समाप्त करना।
- दिनभर मन को शुद्ध रखना और किसी से कड़वा व्यवहार न करना।
🌕 भगवान : करवा चौथ की रात, आरती और व्रत खोलने की विधि 🌕
करवा चौथ का दिन भले ही सुबह से शुरू होता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समय रात का होता है। जैसे ही चाँद निकलता है, महिलाएँ अपनी पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ व्रत समाप्त करती हैं।
🌸 शाम की तैयारी और पूजा
सूर्यास्त के बाद घर को दीपक, फूल और रंगोली से सजाया जाता है। महिलाएँ पूजा स्थल पर करवा, दीपक, हलवा, मिठाई, फूल, रोली और चावल सजाती हैं। फिर वे कथा सुनती हैं — वीरवती और अन्य पौराणिक कथाएँ।
🕉️ आरती की विधि
1. पूजा स्थल पर दीपक और करवा रखें।
2. हलवा, मिठाई और फूलों से थाली सजाएँ।
3. कथा सुनते हुए आरती करें।
4. हाथ में करवा और दीपक लेकर चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
5. चाँद को छलनी से देखें और उसके बाद पति का चेहरा देखें।
🌕 चाँद देखना और व्रत खोलना
चाँद निकलते ही महिलाएँ छलनी से चाँद देखती हैं। इसके बाद अपने पति की ओर देखकर उन्हें जल अर्पित करती हैं। पति के हाथ से जल ग्रहण करना व्रत पूर्ण करने की प्रमुख रस्म है। यह व्रत पति की लंबी आयु और सुखी जीवन का प्रतीक है।
✨ रस्मों का महत्व
- छलनी से चाँद देखना → पुरुषार्थ, सुख और सौभाग्य का प्रतीक।
- पति को जल अर्पित करना → लंबी आयु और प्रेम का प्रतीक।
- आरती करना → ईश्वर की भक्ति और व्रत की सफलता सुनिश्चित करना।
- कथा सुनना → धार्मिक शिक्षा और आस्था बढ़ाना।
- सास का आशीर्वाद लेना → घर में प्रेम और सद्भाव बनाए रखना।
🌸 व्रत पूर्ण करने के बाद
व्रत पूर्ण होने के बाद महिलाएँ पति के साथ हलवा और मिठाई ग्रहण करती हैं। घर के सभी सदस्यों के साथ खुशियाँ बाँटी जाती हैं। पूरे दिन का संयम, भक्ति और प्रेम सफलतापूर्वक पूरा होता है
🌸 भगवान : करवा चौथ का संदेश और शुभकामनाएँ 🌸
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं है। यह सच्चे प्रेम, विश्वास और भक्ति का पर्व है। वीरवती की कथा, सुबह की सरगी, दिनभर का निर्जला व्रत, शाम की पूजा और रात में चाँद देख कर व्रत खोलना — सब कुछ हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम त्याग, निष्ठा और परिवार के बंधन में प्रकट होता है।
🌺 मुख्य संदेश
- सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि श्रद्धा और निष्ठा में प्रकट होता है।
- सास और बहू का रिश्ता, पति-पत्नी का प्रेम और परिवार का सौहार्द सबसे महत्वपूर्ण है।
- करवा चौथ के दिन किए गए उपवास और पूजा के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक मूल्यों की याद दिलाई जाती है।
- सोलह श्रृंगार, सरगी, कथा, पूजा और आरती — यह सब महिलाओं के आत्मिक और बाहरी सौंदर्य का प्रतीक हैं।
- इस दिन हर महिला अपने घर, परिवार और पति के लिए अपनी भक्ति प्रकट करती है।
💖 महिलाओं के लिए शुभकामनाएँ
इस करवा चौथ पर हम सभी महिलाओं को यह संदेश देना चाहते हैं — अपने परिवार, प्रेम और विश्वास को बनाये रखें। अपने भीतर की शक्ति और भक्ति को जागृत करें। सच्चा प्रेम और श्रद्धा हमेशा फल देती है। 🌸
🌸 करवा चौथ: कहाँ और कैसे मनाया जाता है 🌸
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं है। यह सच्चे प्रेम, विश्वास और भक्ति का पर्व है। शादीशुदा महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। सूर्य उगने से लेकर चाँद निकलने तक महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चाँद देख कर व्रत खोलती हैं।
🏡 प्रसिद्ध क्षेत्र
करवा चौथ मुख्य रूप से भारत के निम्नलिखित क्षेत्रों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है:
- मिथिला (बिहार): मिथिला के लोग इसे विशेष श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाते हैं।
- राजस्थान: महिलाएँ पारंपरिक पोशाक में सज-धज कर पूजा करती हैं और खास रस्में निभाती हैं।
- पंजाब: समूह में कथा और आरती का आयोजन किया जाता है, व्रत को भक्ति और प्रेम के साथ रखा जाता है।
- उत्तर प्रदेश और हरियाणा: यहां भी महिलाएँ अपने परिवार के साथ इसे उत्सव की तरह मनाती हैं।
- मुंबई और अन्य महानगर: यहाँ रहने वाली महिलाएँ भी अपने परिवार और पति के लिए इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति के साथ करती हैं।
- गुजरात और महाराष्ट्र: हाल के वर्षों में, उत्तर भारत की संस्कृति के प्रभाव से यहाँ भी करवा चौथ मनाया जाने लगा है।
💖 महिलाओं के लिए संदेश
इस दिन सभी महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत करती हैं। सभी सुहागिन अपने परिवार और प्रेम को बनाए रखने की श्रद्धा दिखाती हैं। करवा चौथ के दिन सरगी, पूजा, कथा, आरती और चाँद को देखकर व्रत खोलना प्रेम, भक्ति और पारिवारिक एकता का प्रतीक है
🌸 भगवान : करवा चौथ का संदेश और शुभकामनाएँ 🌸
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं है। यह सच्चे प्रेम, विश्वास और भक्ति का पर्व है। वीरवती की कथा, सुबह की सरगी, दिनभर का निर्जला व्रत, शाम की पूजा और रात में चाँद देख कर व्रत खोलना — सब कुछ हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम त्याग, निष्ठा और परिवार के बंधन में प्रकट होता है।
🌺 मुख्य संदेश
- सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि श्रद्धा और निष्ठा में प्रकट होता है।
- सास और बहू का रिश्ता, पति-पत्नी का प्रेम और परिवार का सौहार्द सबसे महत्वपूर्ण है।
- करवा चौथ के दिन किए गए उपवास और पूजा के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक मूल्यों की याद दिलाई जाती है।
- सोलह श्रृंगार, सरगी, कथा, पूजा और आरती — यह सब महिलाओं के आत्मिक और बाहरी सौंदर्य का प्रतीक हैं।
- इस दिन हर महिला अपने घर, परिवार और पति के लिए अपनी भक्ति प्रकट करती है।
💖 महिलाओं के लिए शुभकामनाएँ
इस करवा चौथ पर हम सभी महिलाओं को यह संदेश देना चाहते हैं — अपने परिवार, प्रेम और विश्वास को बनाये रखें। अपने भीतर की शक्ति और भक्ति को जागृत करें। सच्चा प्रेम और श्रद्धा हमेशा फल देती है। 🌸🌕
🌹 निष्कर्ष :
करवा चौथ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और परिवार के बंधन का दिव्य उत्सव है।
वीरवती की कथा और रस्में हमें याद दिलाती हैं कि सच्चा प्रेम और निष्ठा सदैव जीवन में सौभाग्य और सुख लाती है।
आप सभी को करवा चौथ की ढेर सारी शुभकामनाएँ! 🌸🌕



