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| शुभ दीपावली |
🪔 दीपावली 2025: खुशियों, रोशनी और समृद्धि का पर्व 🪔
दीपावली, जिसे दीवाली के नाम से भी जाना जाता है, हमारे जीवन में प्रकाश और आशा का पर्व है। यह वह समय है जब घरों के कोने-कोने में दीपक सजते हैं, रंगोली के उजले रंग बिखरते हैं और अपनों के साथ मिलकर मिठास बाँटी जाती है। इस लेख में हम 2025 की दीवाली की महत्वपूर्ण तिथियाँ, पूजा मुहूर्त, शहरों के अनुसार परंपराएँ और कुछ सरल तथा असरदार उपाय विस्तार से जानेंगे।
दीपावली केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है; यह अपनी परंपराओं से हमें आत्म-निरीक्षण, परोपकार और परिवार के साथ जुड़ने की सीख देती है। हर दीपक एक नए आरम्भ का संदेश देता है — आइए इस वर्ष इसे उल्लास और विवेक दोनों के साथ मनाएँ।
🪔 दीवाली 2025 — महत्वपूर्ण तिथियाँ और पूजा मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा की प्रमुख तिथि इस वर्ष 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) है। पूजा का श्रेष्ठ समय शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे के बीच माना जा रहा है। प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से 8:18 बजे तक रहेगा। अमावस्या की तिथि का असर और निशित काल की गणना स्थान-विशेष पर हल्की बदल सकती है, अतः अंतिम पुष्टि अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य कर लें।
निशिता काल का समय इस वर्ष रात्रि में है — रात 11:41 बजे से 12:31 बजे (21 अक्टूबर) तक। ध्यान रखें कि ये समय उदाहरणतः न्यूट-आधारित न्यू दिल्ली के लिए दिए गए हैं; शहरानुसार कुछ मिनटों का अतिरिक्त अंतर संभव है।
🏙️ शहरों के अनुसार दीवाली मनाने के तरीके
दिल्ली
दिल्ली की गलियाँ और घर दीवाली पर विशेष रूप से जगमगा उठते हैं। लोग घर की गहरी सफ़ाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं और शाम को परिवार के साथ दीपक जलाकर आरती करते हैं। बाज़ारों में खरीदारी और मिठाइयों की रौनक देखने लायक होती है।
मुंबई
मुंबई में दीवाली का उत्सव बहुत ऊर्जावान और सामुदायिक होता है। समुद्र तटों के किनारे दीप जला कर लोग दैवीय आभा का अनुभव करते हैं। यहाँ धनतेरस पर नए बर्तन और आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है।
कोलकाता
कोलकाता में दीवाली का रंग अलग तरह का है — यहाँ देवी काली की आराधना और विशेष पकवानों का आयोजन दीवाली के दिन देखने को मिलता है। घरों में दीपक और मोमबत्तियाँ जलाकर खुशियाँ मनाई जाती हैं।
पटना
पटना में पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये, फूल और प्रसाद देने की परंपरा मजबूत है। यहाँ समुदाय में मिल-बाँट कर खुशियाँ फैलाना मुख्य रस्म है।
मिथिला
मिथिला में रंगीन 'आरिपन' और पारंपरिक गीतों के साथ दीवाली का आयोजन होता है। महिलाएँ सज-धज कर घर को स्वच्छ करके माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करती हैं।
🧿 गुप्त उपाय और धन लाभ के सरल उपाय
लक्ष्मी पूजन में बताशे, अनार और नारियल का अर्पण पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। यह सरल परंपरा घर में समृद्धि और खुशहाली लाने का प्रतीक मानी जाती है।
गणेश पूजा में मोतीचूर के लड्डू और केले का भोग लगाने से घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनता है और शुरूआती बाधाएँ दूर होती हैं। दीपक घर के कोनों में जलाने से नकारात्मक ऊर्जा शान्त होती है।
एक सुरक्षित गुप्त उपाय: शुक्रवार की शाम को हल्का सा दीपक और गुलाब की मालिका रखकर माता लक्ष्मी के लिए छोटे-से मनन में अपने अन्दर आभारी भाव रखें। यह क्रिया आत्मा और मन दोनों को प्रशांत बनाती है।
🎆 पाँच दिवसीय दीवाली कार्यक्रम
धनतेरस — 18 अक्टूबर 2025
धनतेरस पर परम्परानुसार नए बर्तन, चांदी या सोने की छोटी चीज़ें खरीदी जाती हैं। यह दिन स्वास्थ्य और संपन्नता के लिए शुभ माना जाता है।
नरक चतुर्दशी — 19 अक्टूबर 2025
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान, उबटन और छोटी पूजा की परंपरा होती है। यह दिन व्यक्ति के अंदर की दूषित प्रवृत्तियों का नाश करने का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन एक विशेष दीप जलाया जाता है जिसे “यम का दीप” कहा जाता है। यह दीप दक्षिण दिशा की ओर घर के बाहर रखा जाता है। मान्यता है कि इस दीप को जलाने से सभी बुराइयाँ घर से बाहर चली जाती हैं। यम भगवान इस दीप को देखकर अपने आशीर्वाद से परिवार की रक्षा करते हैं और किसी भी बुरी दृष्टि को पीछे नहीं लौटाते।
पुराने समय में लोग इसे कूड़े के ढेर में जलाया करते थे, ताकि जितनी भी बुराइयाँ हैं, वे पूरी तरह से समाप्त हो जाएँ। आजकल यह परंपरा केवल एक दीप जलाने की है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन केवल एक दीप जलाना चाहिए और इसे सही दिशा में रखना चाहिए। यम जी का यह दीप जलाने से अकाल मृत्यु की संभावना नहीं रहती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मुख्य दीवाली (लक्ष्मी पूजा) — 20 अक्टूबर 2025
इस दिन शाम को लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर घर और व्यवसाय में समृद्धि की कामना की जाती है। दीयों की रोशनी से घर जगमगा उठता है और सुख-शांति का वातावरण बनता है।
गोवर्धन पूजा — 21 अक्टूबर 2025
गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण द्वारा दिखाए गए पर्यावरण प्रेम और सेवा का स्मरण होता है। इस दिन व्रत और भोग का आयोजन होता है।
भाई दूज — 22 अक्टूबर 2025
भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख की कामना करती हैं। इस दिन भाई-बहन के निकट सम्बन्धों को नए जोश से मनाया जाता है।
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| रंगोली |
🌟 दीपावली 2025 का सुंदर संदेश
दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की अच्छाई, दया और कृतज्ञता को जगाने का समय है। जब हम अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं, तो याद रखें कि असली रोशनी हमारे कर्मों, शब्दों और भावनाओं से आती है।
✨ शुभ दीपावली!
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके घर को धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य से भर दें। आप और आपका परिवार हमेशा सुरक्षित, खुश और समृद्ध रहें।
🎨 दीपावली पर घर सजाने के आसान उपाय
दीपावली पर घर सजाने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है — रोशनी, फूल और सुगंध का संतुलन। दरवाज़े पर आम और अशोक के पत्तों की तोरण बाँधें और द्वार के दोनों ओर पीतल या मिट्टी के दीपक रखें।
घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गुलाब, गेंदे और रजनीगंधा के फूलों की माला टाँगना भी शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और वातावरण में मधुरता आती है।
रंगीन लाइट्स का चयन करते समय हल्के सुनहरे या पीले रंग की रोशनी को प्राथमिकता दें — यह घर को अधिक गर्माहट और पारंपरिक सौंदर्य देती है। अधिक चमकदार नीली लाइट्स से बचें, क्योंकि यह मानसिक शांति को कम करती हैं।
💡 टिप: पश्चिम दिशा में एक छोटा सा दीपक जरूर जलाएँ — यह माँ लक्ष्मी के प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ होता है।
🌸 रंगोली और शुभ प्रतीक डिज़ाइन
दीवाली पर रंगोली बनाना न केवल सजावट है, बल्कि यह एक धार्मिक प्रतीक भी है। रंगोली घर में माँ लक्ष्मी का स्वागत करती है और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर रखती है।
पारंपरिक डिज़ाइनों में कमल का फूल, स्वस्तिक, दीपक और "शुभ-लाभ" का चिन्ह विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। गुलाबी, पीला और लाल रंग समृद्धि के प्रतीक हैं, जबकि हरा और नीला संतुलन और शांति का संकेत देते हैं।
यदि आपके पास अधिक समय न हो, तो आप फूलों की पंखुड़ियों और दीयों से मिनी-रंगोली बना सकती हैं — यह भी उतनी ही सुंदर और आकर्षक लगती है।
🌺 “जहाँ रंगोली, वहाँ लक्ष्मी का निवास” — यह प्राचीन मान्यता आज भी सत्य मानी जाती है।
🪔 लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि (सरल चरणों में)
1️⃣ सबसे पहले घर के उत्तर-पूर्व दिशा को स्वच्छ करें और वहाँ एक लाल या पीले कपड़े पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति रखें। दोनों मूर्तियों के सामने दीपक जलाएँ और अगरबत्ती लगाएँ।
2️⃣ माँ लक्ष्मी को सफेद पुष्प, कमल, चावल और सिक्कों का अर्पण करें। भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और गुड़ अर्पित करें।
3️⃣ ध्यानपूर्वक नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें —
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।” “ॐ गण गणपतये नमः।”
4️⃣ इसके बाद दीपक, कपूर और पुष्पों से आरती करें। आरती के बाद मिठाई का भोग लगाकर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
🌼 लक्ष्मी पूजा के समय मन को शांत रखें और अपने घर में प्रेम और आभार का भाव फैलाएँ।
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| दीपक |
🔮 दीवाली के दिव्य गुप्त उपाय
🔹 दीवाली की रात अपने घर के मुख्य द्वार पर सात दीपक रखें — यह धन और सौभाग्य के द्वार खोलता है। 🔹 पूजा के बाद एक सिक्का लाल कपड़े में बाँधकर अपने पर्स में रखें, यह वर्षभर आर्थिक स्थिरता लाता है। 🔹 रात्रि 12 बजे एक दीपक जलाकर “ॐ श्रीं नमः” मंत्र का 108 बार जप करें — यह आत्मबल और आर्थिक उन्नति दोनों को बढ़ाता है।
💰 “जहाँ दीपक जलता है, वहाँ अंधकार कभी स्थायी नहीं रहता।” — यही है दीवाली का सार।
🌟 दीपावली का संदेश
दीपावली का उत्सव हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी अंधेरी राह क्यों न हो, आशा और प्रेम के दीप जलाकर हम उजाला ला सकते हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा सदा उन पर बरसती है जो दूसरों में भी रोशनी बाँटते हैं।
🙏 “दीप जलाएँ, दिल मिलाएँ और नई शुरुआत करें।” यही है सच्ची दीपावली।
💖 शुभ दीपावली 2025 — आपके जीवन में हर दिन नई रोशनी लाए! 💖
🪔 दीवाली क्यों मनाई जाती है? पौराणिक कथा 🪔
दीवाली का त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार केवल दीपों का पर्व नहीं बल्कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत में पूरे नगर को दीपों से जगमगा दिया था। तभी से यह पर्व “दीपावली” कहलाया।
कहा जाता है कि जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास पूरा कर लौटे, तब उनके आगमन की खुशी में लोगों ने अपने घरों में दीप जलाए। इसलिए दीवाली को प्रकाश पर्व कहा जाता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और आर्थिक समृद्धि के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन, वैभव और सौभाग्य का आगमन होता है।
🌼 भगवान कृष्ण और नरकासुर की कथा
दीवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस विजय की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसीलिए इसे नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली कहा जाता है।
👫 भाई दूज की कथा और महत्व 👩❤️👨
दीवाली के पाँचवे दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव की पत्नी छाया और उनके पुत्र यमराज की बहन यमुना ने अपने भाई को अपने घर आमंत्रित किया था। यमराज ने अपनी बहन के घर जाकर भोजन किया और उपहार दिए।
यमराज ने कहा कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर स्नेहपूर्वक भोजन करेगा, उसे दीर्घायु और मृत्यु से मुक्ति प्राप्त होगी। तब से यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती हैं, और भाई बहन को उपहार देता है।
🌷 भाई दूज के दिन के शुभ उपाय
- भाई के तिलक में हल्दी, चावल और दूर्वा घास का प्रयोग शुभ होता है।
- इस दिन बहन अपने घर के दरवाज़े पर दीप जलाए, इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- भाई अगर अपनी बहन को लाल या पीले रंग के कपड़े उपहार में दे, तो रिश्तों में मिठास बनी रहती है।
🌺 दीवाली से मिलने वाले जीवन के संदेश 🌺
दीवाली हमें सिखाती है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, अगर मन में विश्वास और प्रेम के दीप जलाए जाएँ तो जीवन रोशन हो जाता है। यह त्योहार न केवल भगवान की पूजा का अवसर है, बल्कि परिवार, प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। आइए इस दीवाली हम अपने जीवन से नकारात्मकता मिटाएँ और प्रेम, करुणा और रोशनी से भर दें।
✨ शुभ दीवाली — आपके जीवन में प्रकाश, प्रेम और समृद्धि सदैव बनी रहे ✨
🌿 गोवर्धन पूजा की कथा और महत्व 🌿
दीवाली के अगले दिन यानी अन्नकूट या गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की याद में मनाया जाता है। कथा के अनुसार, जब इंद्र देव के अहंकार को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने लोगों को समझाया कि हमें वर्षा के देव इंद्र की नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि वही हमें भोजन, जल और आश्रय देता है।
इस बात से क्रोधित होकर इंद्र ने भयंकर वर्षा शुरू की, तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर पूरे गाँव की रक्षा की। सात दिनों तक वर्षा होने के बाद इंद्र का अभिमान टूट गया। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन गोवर्धन की पूजा कर अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति की सेवा और संरक्षण ही सच्ची पूजा है।
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| शुभ दीपावली |
🌾 गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें 🌾
- सुबह गाय और बैल की पूजा करें, क्योंकि वे कृषि और अन्न के प्रतीक हैं।
- आटे या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर उसमें दीप जलाएँ।
- 108 प्रकार के व्यंजन या जितना संभव हो, अन्न का भोग लगाएँ।
- सांझ के समय परिवार संग मिलकर गोवर्धन परिक्रमा करें।,
✨ शुभ दीवाली — आपके जीवन में प्रकाश, प्रेम और समृद्धि सदैव बनी रहे ✨
🎇 दीवाली — उजाला जो जीवन को नया अर्थ देता है 🎇
दीवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाती है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, अगर दिल में उम्मीद और विश्वास का दीपक जल जाए, तो हर कोना रोशन हो सकता है।
दीवाली हमें सिखाती है कि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं और प्रेम जताने से रिश्ते गहराते हैं। इस दिन हम सिर्फ अपने घर ही नहीं, बल्कि अपने दिल के द्वार भी खोलते हैं — ताकि प्रेम, करुणा और दया के दीप हमेशा जलते रहें।
💫 इस दीवाली एक वचन लें 💫
- किसी जरूरतमंद की मदद करें — एक दीप उसके घर भी जलाएँ।
- नकारात्मकता और पुराने दुखों को छोड़कर नई ऊर्जा को अपनाएँ।
- परिवार और मित्रों के साथ हँसी, प्यार और अपनापन बाँटें।
- पर्यावरण का ध्यान रखें — मिट्टी के दीपों से घर सजाएँ।
🌸 दीवाली 2025 के लिए शुभकामनाएँ 🌸
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आपके घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य का वास हो। आपके जीवन का हर दीपक नई आशा, नया जोश और सफलता की नई किरण लेकर आए।
✨ शुभ दीवाली 2025 ✨
आपका जीवन खुशियों की रोशनी से जगमगाता रहे 💖
🪔 दीपों की रौशनी से आपका हर दिन उज्जवल बने, यही मंगलकामना है — जय माँ लक्ष्मी 🪔
(लेखक: रानी कुमारी झा — आपकी अपनी ब्लॉग लेखिका, जो हर त्योहार को दिल से महसूस करती हैं 🌼)



