झूले पर महिलाएं गाना गाते हुए
🌼 पारंपरिक मैथिली लोकगीत: हरियाली तीज एवं मधुश्रावणी विशेष 🌿
🌺 लोक परंपरा में देवी गौरी की पूजा और उनसे जुड़ी गीतों का एक विशेष स्थान है। सावन के महीने में, जब प्रकृति हरियाली ओढ़े होती है, तब महिलाएं अपने मन की व्यथा, प्रेम, समर्पण और श्रद्धा को गीतों के माध्यम से माँ गौरी तक पहुँचाती हैं। यहाँ हम कुछ चुनिंदा मैथिली लोकगीत प्रस्तुत कर रहे हैं जो मधुश्रावणी व्रत और हरियाली तीज में गाए जाते हैं, साथ ही भावार्थ भी दे रहे हैं ताकि हर पाठक माँ के भाव को आत्मसात कर सके।
🎶 " सभक सुधि आँखि ले होइ छै अयलै,"
सभक सुधि आँखि ले होइ छै अयलै,
हमर कियो बिसरि गेलै हे - २
हमर कियो बिसरि गेलै हे मैया...
अति गंगाजल सिन्दूर पोतै छी,
अनुष्ठान करतै छी रे,
शंकर समान वर भेटए, आंगन पूजन करतै छी रे...
भगति विशेषति सुपिय गोसाइनि,
अन्तस्त जागि गेलै हे।
गाछ छोड़ि दिअ मइया कहतै,
हमर निन्दा करतै छी रे।
नित्य पटन-पटन ध्यान करतै छी,
नाम अद्भिर जपतै छी हे।
छी जामबुआ, उग अवकाशा,
तारिनि तारिनि भव छी हे।
🎶 "हम कखन सर्ठार मैया..."
हम कखन सर्ठार मैया, बोलू नै कहै छै दुलरू... जतब दिन के नैहर रहियै ओतबे दिन के बोलू। हम कखन सर्ठार मैया... अंगना मा बड़ सुख पबि, सासु ससुर सन... ओहू सुख नै हरियर बैरी, बोलू नै कहै छै दुलरू... भाय बैनी नयन मुँदी, मायो नैहर भूलू... हम कखन सर्ठार मैया... दुलहा से मिलल धिया पुत, सासु से मिलल ममता... ससुर से मिलल आदर... हम कखन सर्ठार मैया...
🌸 भावार्थ:
यह लोकगीत नवविवाहित वधु के मन की भावनाओं को दर्शाता है। वह सास-ससुर के घर में सुख तो पाती है, परंतु नैहर की यादें और पति के साथ संकोच भी बना रहता है। यह गीत एक मधुर विनती है माँ गौरी से कि वह उसकी झिझक और संकोच को दूर करें।
🎶 2. "विनती सुनियो हे महारानी..."
विनती सुनियो हे महारानी, हम सब ठाढ़ शरण में ना। विनती सुनियो हे महारानी, हम सब ठाढ़ शरण में ना - २ मैया ठाढ़ शरण में ना, विनती सुनियो हे महारानी... अक्षत चानन, अहाँ के चढ़ायब - २ मां से आरती उतारब ना... बेली चमेली केर हार चढ़ायब - २ मां से अर्घ्य चढ़ायब ना... करिया छागर मां के धूर लगायब - २ मां से चढ़ाब सुगंध ना...
🌼 भावार्थ:
यह गीत माँ गौरी के चरणों में समर्पण की एक अपूर्व अभिव्यक्ति है। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसे अपनी शरण में ले लें। वह कहता है कि वह सच्चे मन से अक्षत, दीप, पुष्प और सुगंध समर्पित करेगा, और माँ की पूजा करेगा – बस माँ उसका स्वीकार कर लें। यह गीत व्रती स्त्रियों की विनम्रता और भक्ति को व्यक्त करता है।
🎶 3. "टेमी टेमी कहै के सखी उठलू..."
टेमी टेमी कहै के सखी उठलू गहना के गोड़ मा पहनलू... फूल के गजरा हे मैया टेमी के संगे धरलू... हमरो पिया पावन लगै छै भोर भोर में अइले... गौरी गौरा के देख गइले पियवा के मनवा भरलू...
🌸 भावार्थ: यह गीत व्रती स्त्री के श्रृंगार और प्रेमभाव को दर्शाता है। वह अपनी सहेलियों के साथ ‘टेमी’ के दिन सजी-सँवरी, फूलों का गजरा पहने देवी की पूजा में लगती है। वह अपने प्रियतम की उपस्थिति का अनुभव करती है और माँ गौरी से उसके मिलन की कामना करती है।
🎶 4. "हमरा जोबन केर रखवारि करिहे मां..."
हमरा जोबन केर रखवारि करिहे मां, हे गौरी मां, रखवारि करिहे मां... हमरा जीवन के सहारा बनू मां हमरा लाज-शरम के डारि करिहे मां... हमरा सपना में अइबू मां, हमरा पीड़ा में सहारा बनबू मां...
🌺 भावार्थ:
यह एक करुण विनती है माँ गौरी से। युवती माँ से अनुरोध करती है कि वह उसके यौवन की रक्षा करें, उसकी मर्यादा बनाए रखें और जीवन में सहारा बनें। माँ के प्रति विश्वास, स्नेह और संपूर्ण समर्पण इस गीत में झलकता है।
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🎶हम सखिया संगे गौरी...
हम सखिया संगे गौरी के गीत गावै छी,
नयन भरि नेहाल, अंचरा में फूल सजावै छी।
मंदिर के अंगनवा में झूला पड़ल,
गौरी माई झूले, सखिया सब झूलावै छी।
फूल-फूल चुन चुन पाथरि देबै थाल,
भक्ति प्रेम सं भिजल, हम करै छी सवाल।
🌸 भावार्थ:
यह गीत युवतियों की टोली द्वारा मंदिर में माँ गौरी की पूजा और झूला झुलाने के भाव को दर्शाता है। सभी सखियाँ मिलकर माँ के लिए गीत गा रही हैं।
🌿 इन लोकगीतों के माध्यम से हम माँ गौरी की पूजा करते हुए जीवन की भावनाओं, रिश्तों और इच्छाओं को उजागर करते हैं। मैथिली संस्कृति की यही सुंदरता है – जहाँ गीतों में भक्ति और प्रेम दोनों समाहित रहते हैं। 🙏💚
©️ Dev Srishti Lok | मैथिली लोक परंपरा संरक्षण 🌾

