🌺 नवरात्रि पाँचवा दिन 2025: मां स्कंदमाता पूजा विधि, कथा, महत्व और आरती 🌺


माता की कार्तिकेय पुत्र के साथ तस्वीर
स्कंदमाता


🌺नवरात्रि पाँचवा दिन (पंचमी): मां स्कंदमाता 🌺 

नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और शक्तिशाली पर्व है। यह नौ दिनों तक चलने वाला त्योहार मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए मनाया जाता है। प्रत्येक दिन देवी का एक अलग स्वरूप पूजनीय होता है और हर स्वरूप का अपना महत्व और विशेषता है। नवरात्रि का पाँचवा दिन, जिसे पंचमी तिथि कहते हैं, मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना को समर्पित है। पंचमी तिथि 2025 में 27 सितंबर, शनिवार है।

नवरात्रि के पाँचवा दिन, मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाती है। “स्कंद” शब्द भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम है और स्कंदमाता का अर्थ है – “भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता”

🌸 मां स्कंदमाता का स्वरूप

मां स्कंदमाता को शक्ति और मातृत्व का अद्भुत संगम माना जाता है। उनका स्वरूप भक्तों को शांति और साहस प्रदान करता है। वे चार भुजाओं से सुशोभित हैं:

  • 🌼 एक हाथ में कमल पुष्प धारण करती हैं – शुद्धि और ज्ञान का प्रतीक।
  • 🌼 दूसरे हाथ में शिशु स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में लिए रहती हैं।
  • 🌼 तीसरा हाथ वर मुद्रा में होता है – मनोकामना पूर्ण करने के लिए।
  • 🌼 चौथा हाथ अभय मुद्रा में होता है – भय और संकट से मुक्ति देने के लिए।

मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।

✨ पांचवा दिन का आध्यात्मिक महत्व

  • 🪔 मन की स्थिरता और संतुलन प्राप्त होता है।
  • 🪔 जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • 🪔 व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

🧘 मन का विश्लेषण

नवरात्रि का पाँचवा दिन केवल पूजा का नहीं बल्कि मन को समझने और शुद्ध करने का दिन भी है। शास्त्रों के अनुसार, मन हमारे विचारों, भावनाओं और इच्छाओं का केंद्र है।

🌼 मन की उत्पत्ति

पुराणों में कहा गया है कि मन का जन्म ब्रह्मा के साथ ही हुआ। यह अदृश्य शक्ति है, जो हमारी सोच और कर्मों को नियंत्रित करती है।

  1. सकारात्मक मन: प्रेम, करुणा, धैर्य और सहानुभूति को जन्म देता है।
  2. नकारात्मक मन: क्रोध, लालच, भय और घृणा उत्पन्न करता है।

पांचवा दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते समय लक्ष्य होता है – मन को शुद्ध करना और सकारात्मक विचारों से भरना।

🌼 मन की विशेषताएँ

  • ✨ मन अदृश्य होते हुए भी हमारे जीवन का आधार है।
  • ✨ अहंकार, ईर्ष्या, लालच और भय से यह अशांत हो जाता है।
  • ✨ भक्ति और ध्यान से मन को स्थिर किया जा सकता है।
स्कंद माता की तस्वीर
स्कंदमाता और कार्तिकेय


🌼 मां स्कंदमाता की पूजा विधि 🌼

नवरात्रि के पाँचवा दिन मां स्कंदमाता की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। इस दिन भक्त अपने घर में शुद्ध वातावरण बनाकर मां को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।पंचमी तिथि 2025 में 26 सितंबर, शुक्रवार है।

🔅 पूजा सामग्री

  • 🌸 कलश (जल, आम पत्ते और नारियल सहित)
  • 🌸 लाल या गुलाबी वस्त्र
  • 🌸 ताजे कमल या गेंदा के फूल
  • 🌸 रोली, अक्षत, सिंदूर, हल्दी
  • 🌸 धूप, दीपक और घी
  • 🌸 शहद या केले का भोग

🔅 पूजा विधि

  1. ✨ प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. ✨ पूजा स्थान पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. ✨ कलश की स्थापना कर गणेश जी का आह्वान करें।
  4. ✨ मां स्कंदमाता को गंगाजल से स्नान कराकर सिंदूर, रोली और फूल अर्पित करें।
  5. ✨ धूप-दीप जलाकर मां की आरती करें।
  6. मंत्र जप और कथा पाठ अवश्य करें।

🪔 मां स्कंदमाता का मंत्र 🪔

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

इस मंत्र का 108 बार जप करने से मन शुद्ध और स्थिर हो जाता है।

🌸 मां स्कंदमाता की पूजा से लाभ

  • 🌼 भक्त के जीवन से सभी बाधाएँ और दुख दूर होते हैं।
  • 🌼 संतान की प्राप्ति और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • 🌼 व्यापार और करियर में सफलता मिलती है।
  • 🌼 परिवार में शांति, समृद्धि और प्रेम बढ़ता है।
  • 🌼 साधक को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

📖 मां स्कंदमाता की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच घोर युद्ध हुआ तब असुरों का बल बढ़ता गया। उस समय भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) ने देवताओं की सेना का नेतृत्व किया। भगवान स्कंद ने असुरों का संहार कर देवताओं को विजय दिलाई। इसी कारण मां दुर्गा को स्कंदमाता कहा जाता है।

मां स्कंदमाता की पूजा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि – संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि मातृशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है तो विजय निश्चित है।

🧘 मन की साधना और ध्यान 🧘

नवरात्रि के पाँचवा दिन, मां स्कंदमाता की पूजा के साथ-साथ मन की साधना भी की जाती है। इस दिन भक्त अपने मन को शांति और स्थिरता देने का प्रयास करते हैं, ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

🌼 ध्यान की विधि

  1. ✨ प्रातःकाल शांत वातावरण में बैठें।
  2. ✨ आंखें बंद करके गहरी श्वास लें और छोड़ें।
  3. ✨ मन में मां स्कंदमाता का स्वरूप ध्यान करें।
  4. ✨ मंत्र "ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः" का जप करें।
  5. ✨ अपने मन को धीरे-धीरे सभी नकारात्मक विचारों से मुक्त करें।

नियमित साधना से मन शांत, स्थिर और सकारात्मक हो जाता है।

पंडाल में  बढ़ती भीड़ का  अद्भुत नजारा
पंडाल में भी बढ़ती भीड़ 


🌍 विभिन्न परंपराओं में पंचमी दिन का महत्व 🌍

🔹 भारत में

भारत के विभिन्न राज्यों में पाँचवा दिन, मां स्कंदमाता की पूजा विशेष विधि से की जाती है:

  • 🌼 मिथिला (बिहार): यहां लोग नौ दिन का कठोर उपवास रखते हैं। पाँचवा दिन, साधक ध्यान और कथा पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • 🌼 बंगाल: यहां देवी दुर्गा की पूजा भव्य रूप से होती है और पाँचवा दिन, देवी के इस स्वरूप को विशेष भोग अर्पित किया जाता है।
  • 🌼 गुजरात: यहां भक्त गरबा और डांडिया के माध्यम से देवी को प्रसन्न करते हैं।
  • 🌼 दक्षिण भारत: घरों में 'गोलू' सजाया जाता है और मां स्कंदमाता के गीत गाए जाते हैं।

🌸  पंचमी तिथि से उत्सव का प्रारम्भ  🌸

पंचमी तिथि से ही नवरात्रि की रौनक हर जगह और भी बढ़ जाती है। इस दिन से देवी पंडालों में माँ की प्रतिमाएँ सजकर विराजमान हो जाती हैं और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन व भजन-कीर्तन के लिए निकलते हैं। लोग परिवार और मित्रों संग पंडाल-घूमने, प्रकाश, सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने लगते हैं। विशेषकर कोलकाता जैसे शहरों में पंचमी से ही भारी भीड़ उमड़ती है — मानो पूरे शहर में उत्सव का मेला शुरू हो गया हो।


🔹 विदेशों में

विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी इस दिन बड़े उत्साह से पूजा करते हैं। अमेरिका, कनाडा और यूरोप में लोग मंदिरों में एकत्र होकर आरती और भजन संध्या का आयोजन करते हैं।

नेपाल और मॉरीशस जैसे देशों में भी नवरात्रि बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। यहां पांचवा दिन को मातृत्व शक्ति और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

🌸 मन की शुद्धि का संदेश 🌸

नवरात्रि का पाँचवा दिन, हमें यह सिखाता है कि – "जब मन शुद्ध और संतुलित होता है, तभी जीवन में सच्ची शांति और सुख प्राप्त होता है।" मां स्कंदमाता की पूजा और साधना हमें यह मार्ग दिखाती है कि केवल बाहरी भक्ति नहीं बल्कि आंतरिक भक्ति भी आवश्यक है।

🌺 समापन : मां स्कंदमाता का आशीर्वाद 🌺

नवरात्रि का पाँचवा दिनभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां स्कंदमाता केवल संतान सुख ही नहीं बल्कि धन, वैभव, ज्ञान और मोक्ष का भी आशीर्वाद देती हैं। इस दिन की पूजा से साधक का मन शुद्ध होकर भक्ति और शक्ति से परिपूर्ण हो जाता है।

🌼पांचवा दिन से मिलने वाला आध्यात्मिक संदेश

  • ✨ जीवन में कठिनाइयों का सामना धैर्य और साहस से करना चाहिए।
  • ✨ मन की शुद्धि सबसे बड़ा तप है।
  • ✨ मां का आशीर्वाद पाकर हर असंभव कार्य भी संभव हो सकता है।
  • ✨ मातृत्व शक्ति ही संपूर्ण जगत की आधारशिला है।

🪔 मां स्कंदमाता की आरती 🪔

जय स्कंदमाता जय जय शारदे, भक्तों के संकट दूर करो माता। सुख-समृद्धि प्रदान करो, जगदंबे वर दो हमारी।

🌸 निष्कर्ष

नवरात्रि का पाँचवा दिन हमें यह सिखाता है कि – "भक्ति केवल बाहरी आडंबर नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धि और आत्मा के उत्थान का मार्ग है।" मां स्कंदमाता की कृपा से साधक के जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि का संचार होता है।

यदि भक्त सच्चे मन से मां की पूजा करें तो वे उन्हें साहस, धैर्य, ज्ञान और संतान सुख का वरदान देती हैं। इसलिए पांचवें  दिन की साधना को मन और आत्मा के उत्थान का दिन माना जाता है।

🌺 जय स्कंदमाता 🌺

"जय स्कंदमाता! आपकी कृपा से हर मनुष्य के जीवन में प्रकाश फैले।"

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