"नागपंचमी: श्रद्धा और भक्ति का दिव्य संगम"

🐍🌸 नाग पंचमी: एक श्रद्धा, एक सुरक्षा, एक मातृत्व का पर्व 🌿🕉️

"जिस घर में नागों की पूजा होती है, वहाँ रोग नहीं आता, दुख नहीं ठहरता और दरिद्रता नहीं बसती। नाग केवल सर्प नहीं हैं – वे पृथ्वी के प्रहरी हैं, और उनका सम्मान हमारे जीवन की रक्षा है।"

श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला नाग पंचमी भारतवर्ष का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो हमें प्रकृति, मातृत्व और सुरक्षा से जोड़ता है। यह केवल सर्पों की नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा करने वाली शक्तियों की आराधना का दिन है।


📅 नाग पंचमी 2025 की तिथि:

➡️ 29 जुलाई 2025 मंगलवार
यह दिन नाग देवता, विषहरी माता, वासुकि नाग और देवी मनसा को समर्पित है।  नाग पंचमी व्रत 2025 में:तिथि शुरू हो रही है: 29 जुलाई 2025 को दोपहर 12:33 PM से तिथि समाप्त हो रही है: 30 जुलाई 2025 को दोपहर 10:49 AM तक                                                ➡️
इसलिए उदयकालीन पंचमी तिथि होने के कारण नाग पंचमी का व्रत और पूजन 29 जुलाई 2025, मंगलवार को ही रखा जाएगा।



📜 पौराणिक कथाएँ 🙏🏻🐍

1️⃣ आस्तिक मुनि और नाग यज्ञ 🔥

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डस लिया। उनके पुत्र जनमेजय ने नागों के विनाश हेतु यज्ञ प्रारंभ किया। सैंकड़ों नाग जलने लगे। तभी पहुंचे आस्तिक मुनि, जिन्होंने यज्ञ को रोका और नागों की रक्षा की। वह दिन पंचमी तिथि थी — जो आज नाग पंचमी के रूप में मनाई जाती है।

2️⃣ श्रीकृष्ण और कालिया नाग 🌀

यमुना में कालिया नाग ने ज़हर घोल दिया था। बालक श्रीकृष्ण ने जल में उतरकर उसे पराजित किया और उसके सिर पर नृत्य किया। यह दिन अहंकार के अंत और दया की विजय का प्रतीक बन गया।

3️⃣ मनसा देवी और नाग कन्या 🌺

मनसा देवी, जिन्हें विषहरी भी कहा जाता है, भगवान शिव की मानस पुत्री हैं। वे नागों की रक्षिका हैं। नाग पंचमी पर उनकी पूजा से विष नाश होता है, और परिवार में सुरक्षा बनी रहती है।

🌾 मिथिला में नाग पंचमी: नवविवाहिता का श्रृंगार व्रत 👰🏻‍♀️

मिथिलांचल में इस दिन नवविवाहिता स्त्रियाँ मधुश्रावणी व्रत का शुभारंभ करती हैं। यह 13-15 दिनों तक चलता है, जिसमें वे विषहरी माता और नाग देवता की आराधना करती हैं।

मायके से बहुओं को साड़ी, सिन्दूर, लावा, मिठाई, चूड़ियाँ आदि विशेष सामग्री भेजी जाती है।




🪷 नाग पूजा विधि 🕊️📿

  1. दीवार पर हल्दी, चावल और गेरू से नाग चित्र बनाएं।
  2. मिट्टी या गोबर से नाग की मूर्ति बनाएं।
  3. इन वस्तुओं से पूजा करें:
    • 🥛 दूध
    • 🍚 चावल
    • 🌾 लावा
    • 🍃 दूब घास
    • 🧈 घी, 🍯 दही, 🍌 फल और मिठाई
  4. मंत्र:
    नाग देवता नमस्तुभ्यं, त्रैलोक्यं तव पालकं।
    नमोस्तु ते महायोगिन्, नमः शेषनागाय च॥
  5. प्रसाद को बच्चों, परिवार व पड़ोसियों में बाँटें।

🙏🏻 हनुमान जी की भूमिका

कई स्थानों पर हनुमान जी को भी पूजा जाता है ताकि सर्पदोष व भय से मुक्ति मिले। उन्हें सिंदूर, केला, चूरमा अर्पित किया जाता है।


🧿 लोक मान्यताएँ

  • सर्प को दूध पिलाना पुण्यकारी माना जाता है।
  • गर्भवती स्त्रियाँ संतान की रक्षा हेतु नाग पूजा करती हैं।
  • बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।

🔮 मधुश्रावणी व्रत का संबंध 🧺🌸

यह व्रत नाग पंचमी से आरंभ होता है और नवविवाहिताओं के लिए श्रद्धा, श्रृंगार और समर्पण का प्रतीक होता है।

हर दिन विषहरी माता की पूजा, 13 कहानियाँ सुनना और लावा व पकवान अर्पित करना अनिवार्य होता है।


✨ निष्कर्ष ✨

“नाग पंचमी केवल एक पर्व नहीं,
यह धरती के रक्षकों को नमन है,
यह विष पर अमृत की विजय है,
यह भय पर श्रद्धा की जीत है।”

🌿 नाग पंचमी के साथ जीवन में आए सुरक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद। 🌺

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